144 वर्ष बाद महाकुंभ 2025
144 वर्ष बाद महाकुंभ 2025
महाकुंभ 2025 का महत्व
कुंभ मेला का बहुत बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह भारत के प्रयागराज उत्तर प्रदेश में गंगा यमुना और सरस्वती के संगम पर आयोजित हो रहा हैं।
कुंभ मेला चार साल में एक बार लगता हैं।
1 प्रयागराज उत्तर प्रदेश में गंगा यमुना और सरस्वती पर।
2 हरिद्वार उत्तराखंड गंगा नदी पर।
3 उज्जैन मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी पर।
4 नासिक महाराष्ट्र में गोदावरी नदी पर।
कुंभ सबसे बड़े आयोजनों में से एक है। महाकुंभ स्नान पूजा और आध्यात्मिकता का महापर्व माना जाता है। इस बार महाकुंभ का विशेष महत्व है यह कुंभ 144 साल बाद में आता है।
इस महाकुंभ में 40 करोड़ श्रृद्धालुओं का भाग लेने का अनुमान है। यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है।
धार्मिक महत्व
महाकुंभ का आयोजन हिन्दू धर्म में अति पवित्र माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि संगम में स्नान करने से मोक्ष कि प्राप्ति होती है। संगम में शाही स्नान को अमृत स्नान माना जाता है।
महाकुंभ की शुरुआत समुद्र मंथन से होती है। समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला था तब देवता और दानव में युद्ध हुआ और यह युद्ध 12 दिनो तक चला। देवताओं का एक दिन 12 वर्ष के बराबर होता हैं। इसलिए 12 x 12=144 साल बाद महाकुंभ का पर्व मनाया जाता है।
खगोलीय महत्व
सभी कुंभ मेला गृह नक्षत्रों के स्थिति अनुसार होते हैं। ये महाकुंभ बृहस्पति और सूर्य की विशिष्ठ स्थिति के आधार पर हो रहा है।
संतों और साधुओं का संगम
महाकुंभ में लाखों साधू संतो अखाड़ों का आगमन होता है। नागा साधु संत के दर्शन के लिए करोड़ों लोग आते हैं।

Comments
Post a Comment